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 एससी-एसटी में उपवर्ग बनाने की शक्ति राज्यों के पास होगी या नहीं?

SC: शीर्ष अदालत अपने 2004फैसले की जांच करेगा, जिसमें कहा गया था कि राज्यों के पास आरक्षण देने के लिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का उपवर्गीकरण करने का अधिकार नहीं है।

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि वह अपने 2004 के एक फैसले की जांच करेगा। जिसमें कहा गया था कि राज्यों के पास आरक्षण देने के लिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का उपवर्गीकरण करने का अधिकार नहीं है।

मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा कि वह मात्रात्मक आंकड़ों से जुड़ी दलीलों में नहीं जाएगी। जिसकी वजह से पंजाब सरकार को आरक्षण के भीतर पचास फीसदी आरक्षण प्रदान करना पड़ा।

संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति विक्रमनाथ, न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी, न्यायमूर्ति पंकज मिथल, न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र मिश्रा शामिल थे। पीठ के समक्ष पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के 2010 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका भी है।